
दिनांक 7 नवंबर 2025
ये दिन भारतीय इतिहास के स्वर्णिम अक्षरों में लिखा गया है क्योंकि आज से ठीक 150 साल पहले, इसी दिन, देश के महान उपन्यासकार, कवि, पत्रकार एवं लेखक बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने इस अमर गीत, ‘वंदे मातरम्’, की रचना की थी।
बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय का जन्म 28 जून 1838 को नैहाटी, पश्चिम बंगाल में हुआ था। उन्होंने न सिर्फ़ साहित्य की दिशा बदली, बल्कि राष्ट्रीय जागरण में भी अहम भूमिका निभाई थी। वह अपने उपन्यास, सामाजिक लेखन और विज्ञान, साहित्य – इन सब लेखों में निपुण थे, इसीलिए उनकी कृतियों के कारण उन्हें ‘साहित्य सम्राट’ के रूप में सम्मानित किया गया है।
यह गीत की रचना बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने 7 नवंबर 1875 में की थी।
बाद में उन्होंने इस गीत को अपने प्रसिद्ध उपन्यास ‘आनंद मठ’ में 1882 में शामिल किया था। उन्होंने यह उपन्यास 1770 के दशक में हुए संन्यासी विद्रोह आन्दोलन को ध्यान में रखते हुए लिखा था।
‘वंदे मातरम्’ गीत संस्कृत और बंगाली शब्दों के मेल से रचा गया है।
यह गीत मातृभूमि के प्रति प्रेम, समर्पण, बलिदान और कर्तव्य की भावना को जागृत करता है।
जब 1905 में बंगाल का विभाजन हुआ तब, पुरे देश में आंदोलन की आग धधक रही थी। उस दौरान इस गीत ने लाखों लोगों को प्रेरित किया तब यह गीत न केवल स्वतंत्रता का प्रतीक रहा, बल्कि लाखों लोगों को ब्रिटिश राज के ख़िलाफ़ एकजुट करने के लिए एक महान नारा बन गया था।
बाद में, जनवरी 1950 को Constituent Assembly of India ने इस गीत को राष्ट्रीय गीत के रूप में सम्मानित किया और स्वीकृति दी। तब से यह गीत सिर्फ़ एक गीत नहीं, बल्कि एक प्राण है जो हर भारतीयों के रक्त में बहता है। इसी लिए आज के यह पवित्र और ऐतिहासिक दिन पे संकल्प करें कि,
“इस देश की शान में कभी आँच न आने देंगे हम,
जब तक रहेंगे ज़िंदा तब तक गाते रहेंगे हम,
वन्दे मातरम्! वन्दे मातरम्! वन्दे मातरम्!”

Name: Jay Makwana
Study: Bachelor of Arts in Philosophy
College: The Maharaja Sayajirao University of Baroda, Vadodara



जयभाई बहुत अच्छा लिखाहे आपने | ऐसे ही लिखते रहिए और आगे बढ़ते रहिए |
Excellent jay! Keep it up